Swadeshi Movement history India Hindi|स्वदेशी आंदोलन

नमस्कार दोस्तों Swadeshi Movement की यह Post में आपसभी का स्वागत है। आजके यह post में हम Swadeshi Movement के बारे में जानेंगे। स्वदेशी का अर्थ है – अपने देश का। और, उस समय भारत पर ब्रिटेन में बने माल का एक बड़ा बाजार था। जिससे भारतीय अर्थबेवस्ता को काफी नुकशान का सामना करना पड़ा था। और, भारी मात्रा में भारत के लोगों बेरोजगार हुए थे।

इसीलिए साल 1905 में स्वदेशी आंदोलन की शुरुवाद भारत के लोगों द्वारा किया गया था। इस आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना और ब्रिटेन में बने माल का बहिष्कार करना तथा भारत में बने माल का अधिकाधिक प्रयोग करके साम्राज्यवादी ब्रिटेन को आर्थिक हानि पहुँचाना था। इसके साथ भारत की समग्र आर्थिक व्यवस्था के विकास के लिए भी यह Swadeshi Movement बहुत महत्वपूर्ण था।

Swadeshi Movement during the partition of Bengal

  • Swadeshi Movement के समय वर्ष 1905 में बंग-भंग के लिए बहुत बल मिला था।
  • बंग-भंग जो की बंगाल के आंदोलन से सम्बंधित था।
  • और, Lord Curzon द्वारा बंगाल विभाजन की निर्णय की घोषणा 19 July 1905 को किया गया था।
  • स्वदेशी आन्दोलन विशेषकर उस आन्दोलन को कहा जाता हैं,
  • जो बंग-भंग के विरोध में न केवल बंगाल में यह आन्दोलन हुआ था,
  • अपितु पूरे ब्रिटिश भारत पर यह आन्दोलन का प्रभाव था।
  • और, स्वदेशी का यह विचार बंग-भंग से बहुत पुराना था।
  • सबसे पहले भारत में स्वदेशी का नारा बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने साल 1872 में वंगदर्शन के रूप में दिया था।
  • स्वदेशी आंदोलन के समय जब बंगाल का विभाजन हुआ था।
  • उस समय ब्रिटिश सरकार द्वारा बंगाल के पुराने आकार को नए आकर में परिवर्तित कर दिया गया था।
  • जिसमे बंगाल के पुराने प्रांत को पूर्वी पाकिस्तान में साल 16 Oct 1905 में convert कर दिया गया था।
  • और, यही पूर्वी पाकिस्तान को बाद में बांग्लादेश के नाम से जाना गया है।
  • और, अंग्रेज सरकार द्वारा यह विभाजन इसलिए महत्वपूर्ण था क्यों की,
  • बंगाल में शिक्षित मध्यम वर्ग एवं बुद्धिजीवी वर्ग के राजनीतिक प्रभाव को नष्ट करके,
  • हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एक सांप्रदायिक प्रभाव को स्थापित करना था।
  • और, ”Divide and Rule” Policy के तहत ब्रिटिश साम्राज्य को लम्बी period तक भारत पर विस्तार करना मुक्ख उद्देश्य था। 
  • लेकिन, अंग्रेजो की यही विभाजन नीति को Indian National Congress ने सर्वसम्मति से निंदा की थी। 
Swadeshi Movement
Swadeshi Movement

Some facts of Moderated phase before the Boycott Campaign

  • दोस्तों Swadeshi Movement को जानने से पहले Revolt of 1857 के बाद की स्थिति जानना जरुरी है।
  • क्यों की 1857 का विद्रोह पुरे एक साल तक चला था।
  • और, 1858 में यह विद्रोह ख़तम होने के साथ साथ भारत में एक क्रांति की शुरुवाद हो गई थी।
  • उसके कुछ वर्ष बाद 1884 में भारत में Indian National Congress की स्थापना की गई थी।
  • और, इस Party का गठन Allan Octavian Hume ने किया था।
  • Congress party का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार तक देश की बात को रखने का एक जरिया था।
  • और, सबसे पहले Congress party का प्रथम सत्र Bombay में किया गया था।
  • जिसकी अध्यक्षता Womesh Chunder Bonnerjee ने किया था।
  • तथा, इस सत्र में भारत के 72 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
  • इसके साथ, उस समय में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान कुछ नरमवादी नेता भी थे।  
  • जिन्होंने अपने बात को Party के माध्यम से ब्रिटिश सरकार के पास शान्तिपूर्ण तरीके से रखते थे।
  • इनमे से Dada Bhai Naoroji, Gopal Krishna Gokhale, M.G. Ranade एवं Madan Mohan Malviya जैसे और भी कई नरमवादी नेता थे।
  • लेकिन, इसके विपरीत कुछ उग्रवादी चरण के नेता भी थे।
  • जिनका मानना था की ब्रिटिश भारत को शोषण करने की इरादे से अपने आधीन में कर लिया है।
  • इसीलिए ब्रिटिश सरकार के खिलाप आंदोलन की आवश्यकता बहुत जरुरी है।
  • इन उग्रवादी नेता के नाम, Bipin Chandra Pal, Lala Lajpat Rai, Sri Aurobindo Ghosh और Bal Gangadhar Tilak थे।
  • और, इन नेताओं  ने आगे चलकर के स्वदेशी आंदोलन में हिस्सा लिया एवं अपना योगदान भी दिया था।  

Leader of Swadeshi Movement

  • Swadeshi Movement में कई क्रांतिकारियों ने हिस्सा लिया था।
  • जिसमे नरमवादी नेता साथ साथ उग्रवादी चरण के नेता भी शामिल थे।
  • Lala Lajpat Rai, Sri Aurobindo Ghosh, Bal Gangadhar Tilak और V.D. Savarkar ने अहम भूमिका निभाई थी।
  • इसके साथ, Ravindra Nath Tagore ने बंगाल के लिए एक गीत का लेखन भी किया जो बाद में इसका राष्ट्रीय गीत बना था।
  • और, भारत में ब्रिटिश सरकार से आजादी के लिए लड़ाई के दौरान भारतीय राष्ट्रवाद के एक अभिन्न अंग के रूप में विकसित हुआ था।
  • तथा, इस आन्दोलन को Dada Bhai Naoroji, Gopal Krishna Gokhale, M.G. Ranade एवं Madan Mohan Malviya
  • जैसे नरमवादी नेताओ के द्वारा विकसित किया गया था।
  • और, यह आन्दोलन की आर्थिक रणनीति ब्रिटिश उत्पादों के खिलाफ विरोध करना एवं आत्म शासन स्थापित करना था।   
Impact of Swadeshi Movement
  • भारत में Swadeshi Movement ने जब पुरे देश पर जोर पकड़ा था।
  • तो देश की कई हिस्से में इस आंदोलन का प्रभाव था।
  • क्यों की उस समय इस आंदोलन में हिस्सा लेने वाले नेताओ ने लोगो को स्वदेशी आंदोलन के बारे में समझाया था।
  • और, बाद में गाँधीजी ने भी जब इस आंदोलन में योगदान किया था।
  • तो उन्होंने देश की लोगो को यह बात समझाया था की,
  • भारत में बन रहे कच्चे माल को बहुत ही कम दाम में विदेश से निर्यात किया जाता है,
  • तथा, इस कच्चे माल का उपयोग कर जो भी सामान तैयार होता है,
  • उसे बेहद उच्च दामो पर भारत में भेजा जाता है।
  • जिससे भारत के लोगो को नुकशान होता है।
  • इसके बाद से भारतवासियों ने विदेशी वस्तुओं को त्याग करना जारी रखा,
  • और, भारत में तैयार हो रहे वस्तुओं का उपयोग करना सही समझा
  • और, इस आन्दोलन ने ब्रिटिश सरकार की नींव को हिला कर रख दी थी।
  • जिससे पुरे भारत के लोग एकजुट हो गए और स्वराज प्राप्ति की सपने को परिपूर्ण होते देखा गया था।   
Conclusion of Summary
  • Swadeshi Movement के प्रभाव के कारन ही विदेशी सामग्री का लोकप्रियता कम हो गई।
  • और, स्वदेशी सामग्री की लोकप्रियता में बढ़ोत्तरी हुई जिससे घरेलु उपयोगी वस्तुओं का इजाफा हुआ,
  • तथा, कुटीर एवं लघु उद्योगों की निर्माण में भी भारत में तेज़ी आई थी।
  • इसके साथ बैंक एवं बीमा कंपनियों का भी निर्माण भारत में हुआ था।
  • और, इस आन्दोलन से भारत की जनता के मन में भी आत्मनिर्भरता पैदा हो गई,
  • जिससे भारत को सवतंत्रता दिलाने की आत्मशक्ति जाग गई थी।
  • इसके साथ महिलाएं भी पहली बार अपने घरो से बाहर आई और इस आंदोलन में बडचढ़ कर हिस्सा लिया।
  • और, यह आंदोलन बहुत कम समय में अधिक लोकप्रिय हो गई थी।

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