Samrat Ashok History Hindi|सम्राट अशोक का इतिहास

नमस्कार दोस्तों Samrat Ashok पोस्ट में आपका स्वागत है। आजके इस पोस्ट में हमलोग जानने वाले है, मौर्या साम्राज्य के सम्राट ‘अशोक‘ के बारे में। अशोक की प्रारंभिक जीवन से जुड़ी हुई कुछ बाते और सम्राट अशोक के साम्राज्य का विस्तार तथा कलिंग की लड़ाई और Samrat Ashok ने बौद्ध धर्म को अपने धर्म के रूप में स्वीकार क्यों किया था? इस विषय में, इसके एलाबा अशोक के अंत जीवन काल और अशोक के शिलालेख का विवरण के बारे में भी जानेंगे। इसके साथ, सम्राट अशोक से जुड़ी हुई कुछ प्रश्न और उत्तर इस पोस्ट में जोड़े गए है।      

  • मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य थे।
  • और, चंद्रगुप्त मौर्य के पुत्र बिन्दुसार थे।
  • तथा, बिन्दुसार के पुत्र का नाम Ashoka था।
  • अशोक का जन्म ३०४ (304) ईसा पूर्व १३ (13)अप्रैल पाटलिपुत्र, में हुआ था।
  • जिसे आज पटना के नाम से भी  जाना जाता है।
  • जो आधुनिक बिहार राज्य पर स्थित है।
  • अशोक के माता का नाम धर्मा थी।
  • जो, राजा बिन्दुसार की रानी थी।
  • और, राजा बिंदुसार की सोलह पटरानियों और १०१ (101) पुत्रों थे।
  • परंतु, राजा बिंदुसार के पुत्रों में केवल तीन पुत्रों के नाम उल्लेख है,
  • इन तीन पुत्रों के नाम थे, सुशीम, अशोक और तिष्य
  • इनमे से तिष्य अशोक का सहोदर (sibling) भाई था।
  • जबकि सुशीम सबसे बड़ा था।
  • लेकिन, इन सभी पटरानियों में से रानी धर्मा क्षत्रिय कुल से नहीं थी।
  • इसी कारण रानी धर्मा की स्थान राजकुल में विशेष नहीं था।
  • जिसके फलस्वरूप अशोक के कई सौतेले भाई -बहने के साथ बचपन से ही कड़ी प्रतियोगिता रहती थी।
  • तथा, अशोक बचपन से ही सैन्य कार्यकलाप में प्रवीण था।           
Samrat Ashok
Samrat Ashok

The early life of Samrat Ashok

  • सम्राट अशोक बाद में ‘सम्राट’ वने थे, जिसका अर्थ है, ‘सम्राटों का सम्राट’।
  • इससे पहले जब वे राजकुमार थे,
  • तब अशोक का ज्येष्ठ भ्राता सुशीम तक्षशिला प्रान्त का परिचालक था।
  • तक्षशिला में भारतीय-यूनानी मूल के बहुत लोग रहते थे।
  • लेकिन, सुशीम के आयोग्य परिचालना के कारण उस क्षेत्र में विद्रोह पनप उठा था।
  • और, इसी विद्रोह को दमन करने के लिए,
  • सम्राट बिन्दुसार ने सुशीम के निवेदन पर अशोक को विद्रोह दमन करने के लिए उस प्रान्त पर भेज दिया था।
  • और, अशोक के आने की खबर सुनकर ही,
  • विद्रोहियों ने उपद्रव खत्म कर दिया था। 
  • यूद्ध करे बिना उपद्रव खत्म होने के वाद जब अशोक को इसकी प्रसिद्धि मिली,
  • जिसके कारण अशोक के भाई सुशीम को सिंहासन न मिलने का खतरा सताने लगा।
  • इसलिए सुशीम ने सम्राट बिन्दुसार को अनुरोध कर अशोक को दूसरे प्रान्त भेजबा दिया था।
  • इसके वाद अशोक कलिंग चला गया था।
  • और, वे बौद्ध सन्यासियों के साथ रहने लगे थे।
  • इसी अवधि के चलते उन्हें बौद्ध विधि-विधानों तथा शिक्षाओं के वारे में पता चला था।
  • इसी दौरान उनकी मुलाकात एक सुन्दरी लड़की के साथ हुआ था,
  • जिनका नाम देवी था।
  • और,अशोक को देवी से प्रेम होने के कारण,
  • अशोक ने देवी से विवाह कर लिया था।
  • और, उसी समय उज्जैन में विद्रोह हो गया था।
  • जिसके कारन सम्राट बिन्दुसार ने विद्रोह को दमन करने के लिए,
  • अशोक को फिर से बुला लिया था।
  • हालाकि, अशोक के  सेनापतियों ने विद्रोह को पहले ही दबा दिया था।
  • और, अशोक की पहचान को गुप्त ही रखी गई थी।
  • क्यों की, अशोक के ज्येष्ठ भ्राता सुशीम द्वारा उनको मारे जाने का भय था।                    

Expansion (अशोक साम्राज्य)

  • अशोक जब आश्रम में थे तब उनकी ज्येष्ठ भ्राता सुशीम की अपने प्रान्त में आयोग्य परिचालना के कारण,
  • लोगो ने तंग आकर अशोक को कार्यभार अपने अनुकूल चलाने के लिए प्रोत्साहित किया था।
  • क्यों की उस समय सम्राट बिन्दुसार वृद्ध हो चूके थे।
  • और, उसी समय काल के दौरान अशोक को खबर मिली की उनकी माँ को उनके सौतेले भाईयों ने मार डाला था।
  • और, इसी बजह के चलते अशोक ने महल में जाकर अपने सारे सौतेले भाईयों की हत्या कर दी थी।
  • लेकिन, सबसे कम उम्र के अपने सहोदर (sibling) भाई तिष्य को बख्श दिया था।
  • और, फिर मगध की सम्राट बन गए थे।
  • उत्तराधिकार के इस युद्ध में चार साल २७३ – २६९ (273 – 269) ईसा पूर्व के बीच का अंतर है,
  • और, सिंहासन पर अपनी स्थिति को हासिल करने के बाद ही,
  • अशोक ने २६९ (269) ईसा पूर्व में औपचारिक रूप से ताज पहना था।
  • अशोक को सम्राट से चक्रवर्ती सम्राट इसलिए कहते थे,
  • क्यों की महज़ आठ वर्षों में चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने पूर्ब से लेकर पश्चिम तक,
  • यानि पहली बार, पूरे सूर्य-महाद्वीप, पर तथा, अत्यधिक दक्षिण को छोड़कर अपने साम्राज्य को शाही नियंत्रण में कर लिया था।
  • अशोक के समय काल में ही उकेरा गया प्रतीतात्मक चिह्न, को ‘अशोक चिह्न’ के नाम से भी जाना जाता था।
  • जिसे आज भारत का राष्ट्रीय चिह्न के रूप में जाना जाता है।
  • तथा, बौद्ध धर्म के इतिहास में भी गौतम बुद्ध के पश्चात् सम्राट अशोक का ही स्थान आता है।
  • क्यों की बौद्ध धर्म से प्रेरित होकर सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार किया था।                        

During of Ashoka reign Battle of Kalinga

  • राज्याभिषेक होने के बाद २६२ (262) ई. पू. में मगध के चक्रवर्ती सम्राट अशोक और कलिंग के राजा अनंत पद्मनाभन के बिच एक भीषण युद्ध हुआ था।
  • जिसे कलिंग युद्ध के नाम से भी जाना जाता है।
  • और, आधुनिक भारत के कलिंग वर्तमान में भारत के राज्य ओडिशा है।
  • और, इस युद्ध का कारण था।
  • सम्राट अशोक कलिंग पर विजय प्राप्त कर,
  • आपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहते थे।
  • हालाँकि, व्यापारिक दृष्टि से देखा जाए तो कलिंग बहुत महत्वपूर्ण था।
  • क्यों की दक्षिण भारत को जाने वाले स्थल और समुद्र मार्ग पर कलिंग का नियन्त्रण था।
  • और, यहा से दक्षिण-पूर्वी देशो से आसानी से सम्बन्ध बनाए जा सकते थे।
  • इसी कारण, कलिंग युद्ध में मौर्य के १००००० (1,00,000) योद्धाओं,
  • और, कलिंग के १५०००० (1,50,000) योद्धाओं के बिच में युद्ध में भारी नरसंहार का दृश्य एक भयानक दृष्टि प्रस्तुत करता हे।
  • हालाँकि, इस युद्ध में कलिंग की सेना बहुत बहादुरी के साथ लड़ी।
  • लेकिन, अंत में मगध ने जीत हासिल की।
  • तथा, कलिंग के सैनिक युद्ध के मैदान में मारे गए।
  • और, इस युद्ध को Samrat Ashok ने अपनी आँखों से देखा था।
  • क्यों की पूरा कलिंग शहर युद्ध का मैदान में बदल गया था।
  • और, भारी मात्रा में सैनिकों की लाशों से भरा पड़ा था।
  • और, कुछ जीवित सैनिक भीषण दर्द में घायल हुए जमीन पर तड़प ते रहे।
  • बच्चे अनाथ हो गए थे,
  • और, विधवाये रोते रोते निराशा की आगोश में समा गया था।
  • इसी मर्मान्तिक दृष्टि को देखकर सम्राट अशोक की हृदय वयाकुल हो गया था।
  • और, कलिंग के इस युद्ध ने सम्राट अशोक के हृदय को महान परिवर्तन कर दिया था।
  • जिसके बाद सम्राट अशोक की हृदय मानवता के प्रति दया और करुणा से भर गया।
  • और, उन्होंने युद्धकार्य को सदा के लिए विराम करने की प्रतिज्ञा की।             

Samrat Ashok accepted Buddhism as his religion

  • कलिंग युद्ध के बाद Samrat Ashok ने बौद्ध धर्म को अपना धर्म के रूप में स्वीकार कर लिया था।
  • यहा से सम्राट अशोक ने आध्यात्मिक और धम्म विजय युग का दौर शुरू किया था।
  • सम्राट अशोक ने अपने शासन काल में चौदह वर्ष के अवधि में निगोथ नामक भिक्षु द्वारा बौद्ध धर्म की शिक्षा लिया।
  • और, बौद्ध धर्म को स्वीकार करने के बाद,
  • सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म की शिक्षा को अपने जीवन में भी उतारने का प्रयास किया था।
  • बौद्ध कथाओं का ग्रंथ ‘दिव्यावदान’ के अनुसार सम्राट अशोक को दीक्षा देने का श्रेय उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु को जाता है।
  • तथा, सम्राट अशोक ने जनकल्याण के लिए चिकित्सालय, पाठशाला तथा सड़कों आदि का निर्माण भी करवाया था।
  • और, बौद्ध धर्म प्रचार के लिए  सम्राट अशोक ने अपने प्रचारक को नेपाल, श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान और यूनान आदि देशो में भी भेजा था।
  • सम्राट अशोक ने संपूर्ण एशिया में तथा, अन्य आज के सभी महाद्विपों में भी बौद्ध धर्म का प्रचार किया था।
  • और, वे प्रेम, सहिष्णूता, सत्य, अहिंसा एवं शाकाहारी जीवनप्रणाली के सच्चे समर्थक थे।
  • तथा, सम्राट अशोक के समय काल में ही शिक्षा का अच्छा प्रभाव पाया गया है।
  • नालंदा, विक्रमशिला और तक्षशिला जैसे महान विश्वविद्यालय की स्थापना उस समय काल के दौरान की गई थी।
  • तथा, सम्राट अशोक ने अपने साम्राज्य के सभी साधनों को जनता के कल्याण हेतु भी लगा दिया था।
  • और, बौद्ध धर्म के प्रचार पर स्वयम को नियोजित कर लिया था।
  • तथा, सम्राट अशोक के जीवनी में भी उनके जीवनसंगी के वारे में कुछ ज्यादा जानकारी प्राप्त नही है।
  • ‘दिव्यावदान’ ग्रंथ के अनुसार सम्राट अशोक के जीवनसंगी के नाम थे देवी, तिष्यरक्षिता, कारुवाकी और पद्मावती।
  • और, संतान थे पुत्र महेन्द्र और कुणाल तथा, पुत्री संघमित्रा के वारे में जानकारी है।            
Expansion Ashoka kingdom
Expansion Ashoka kingdom

The last life of Samrat Ashok’s

  • मगध साम्राज्य के महान शासक मौर्य वंश के सम्राट अशोक ने अपने जीबन में ३६ (36) वर्षों तक अपने साम्राज्य को कुशल तरीके से संचालित किया था।
  • अशोक के शासनकाल में ही पाटलिपुत्र में तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया था।
  • और, इस संगीति में ‘अभिधम्मपिटक’ की रचना भी हुई थी।
  • और, बौद्ध भिक्षुओ को बौद्ध धर्म की प्रचार के लिए विभिन्‍न देशों में भी भेजा गया था।
  • जिनमें Samrat Ashok के पुत्र महेन्द्र एवं पुत्री संघमित्रा भी सम्मिलित हुए थे,
  • जिन्हें श्रीलंका देश में भेजा गया था प्रचार के लिए।
  • कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने शान्ति को स्वीकर किया था।
  • और, अपने लोगो में भी अहिंसा, शान्ति तथा लोक कल्याणकारी नीतियों का प्रचार किया था।
  • और, लगभग २३७-२३६ (237-236) ई. पू. के अवधि में सम्राट अशोक की मृत्यु हुई थी।
  • सम्राट अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य राजवंश के उत्तराधिकारी एक लम्बे अवधि तक आपने शासन संचालित करते रहे।
  • लेकिन, मौर्य साम्राज्य के पश्‍चिमी और पूर्वी भाग बँट गया था।
  • जिसके कारन, पश्‍चिमी भाग पर कुणाल शासन करता था।
  • जबकि पूर्वी भाग पर दसरथ शासन करता था।
  • लेकिन १८० (180) ई. पू. तक पश्‍चिमी भाग पर बैक्ट्रिया यूनानी (Greeks) का पूर्ण अधिकार हो गया था।
  • और, पूर्वी भाग पर विहदब्रत का राज्य था।
  • वह मौर्य वंश का अन्तिम शासक था।
  • और, उनके प्रमुख सेनापति थे पुष्यमित्र सुंगा,
  • जिन्होने बाद में सुंग वंश को स्थापित किया था।                           
Description of Ashoka Inscription
  • सम्राट अशोक ने अपने समय काल में स्तंभों, चट्टानों और गुफाओं की दीवारों में कई अभिलेखो को खुदवाए थे।
  • इन शिलालेखों के अनुसार Samrat Ashok के बौद्ध धर्म को फैलाने के प्रयास भूमध्य सागर के क्षेत्र तक सक्रिय थे।
  • इनमें बौद्ध धर्म की बारीकियों पर ज़ोर कम दिया गया है।
  • और, मनुष्यों के जीवन जीने की आदर्श के ऊपर अधिक ज़ोर दिया गया था।
  • पूर्वी क्षेत्रों में यह शिलालेखों को मगधी भाषा में ब्राह्मी लिपि के प्रयोग से लिखा गया था।
  • और, पश्चिमी क्षेत्रों के शिलालेखों को संस्कृत भाषा से मिलती-जुलती खरोष्ठी लिपि का प्रयोग से लिखा गया था।
  • मगध तथा भारतीय उपमहाद्वीप में कई जगहों पर सम्राट अशोक के अवशेष मिले हैं।
  • जैसे, पाटलिपुत्र के पास कुम्हरार में अशोककालीन के अवशेष मिले हैं।
  • तथा, लुम्बिनी में भी अशोक स्तंभ देखा जा सकता है।
  • और, कर्नाटक के कई स्थानों पर अशोक के धर्मोपदेशों के खुदी हुई अभिलेख मिले हैं। 
Description of the pillars, rocks, and caves of Ashoka Kingdom

** सम्राट अशोक के चौदह प्रमुख चट्टानो के शिलालेखों की विषय वस्तु हे।

King Ashok’s fourteen Major Rock Edicts

1. पशु बलि और उत्सव के प्रतिबंध।

2. सामाजिक कल्याण के उपाय।

3. ब्राह्मणों का सम्मान।

4. रिश्तेदारों, बुजुर्गों, जानवरों के लिए विचार करने के लिए शिष्टाचार।

5. धम्म महामंत्रों और उनके कर्तव्यों की नियुक्ति।

6. प्रशासन के कुशल संगठन की आवश्यकता।

7. सभी धार्मिक संप्रदायों के बीच सहिष्णुता की आवश्यकता।

8. धम्म यात्रों की प्रणाली।

9. व्यर्थ समारोहों और अनुष्ठानों पर हमला।

10. युद्ध के बजाय धम्म के माध्यम से विजय।

11. धम्म नीति की व्याख्या।

12. सभी धार्मिक संप्रदायों में सहिष्णुता की प्रार्थना करना।

13. कलिंग युद्ध, पांच समकालीन ग्रीक राजाओं का उल्लेख।

14. धार्मिक जीवन को गति देने की प्रेरणा।

और, इसे पाया गया हे, कलसी (उत्तराखंड), जूनागढ़ (गुजरात), सोपारा (महाराष्ट्र), जौगड़ा (उड़ीसा) आदि….

** २ कलिंगा चट्टानो के शिलालेखों की विषय वस्तु हे।

Two Kalinga Rock Edicts

1. कलिंग युद्ध के बाद प्रशासन की नई व्यवस्था

और, इसे पाया गया हे, जौगड़ा (उड़ीसा) और डौली तोसलि (पूरी)

** छोटी चट्टानें की विषय वस्तु हे।

Minor Rock Edicts

1. अशोक का व्यक्तिगत इतिहास और उनके धम्म का सारांश

और, इसे पाया गया हे, भाब्रु – बैरत (राजस्थान), मस्की (आंध्र प्रदेश), सासाराम (बिहार) आदि….

** चार स्तंभ शिलालेखों की विषय वस्तु हे।

Four Minor Pillar Edicts

1. धम्म के लिए अशोक की कट्टरता के संकेत

 और, इसे पाया गया हे, साँची (मध्य प्रदेश),

** दो स्तंभ शिलालेखों की विषय वस्तु हे।

Two Tarai Pillar Edicts

 1. अशोक बौद्ध धर्म का सम्मान करते हैं

  और, इसे पाया गया हे, लुम्बिनी (नेपाल)

** गुफा शिलालेखों की विषय वस्तु हे।

Cave Edicts

 1. अशोक सहनशीलता

  और, इसे पाया गया हे, बराबर पहाड़ियों में (गया, बिहार)    

इस पोस्ट से जुड़ी हुई कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर निचे दिए गए है। इसे पड़े

Some Important Question and Answer about Ashoka Kingdom post

1. अशोक के शासनकाल के दौरान बौद्ध परिषद को कहा आयोजित किया गया था?

a. पाटलिपुत्र

b. राजगृह

c. मगध

d. समस्तीपुर

Ans. a. पाटलिपुत्र

2. अशोक के शिलालेखों में प्रयुक्त भाषा कोनसी है?

a. अपभ्रंश

b. संस्कृत

c. हिन्दी

d. प्राकृत

Ans. d. प्राकृत

3. निम्नलिखित में से किस शिलालेख में अशोक के नाम का उल्लेख किया गया है?

a. रुम्मेन्डी पिलर शिलालेख

b. माइनर रॉक एडिक्ट ऑफ़ मास्की (Minor Rock Edict of Maski)

c. भबरू एडिक्ट

d. रॉक एडिक्ट XIII में

Ans. b. माइनर रॉक एडिक्ट ऑफ़ मास्की

4. निम्नलिखित में से किस मौर्य शासकों ने दक्खन पर विजय प्राप्त की?

a. कुणाल

b. अशोक

c. बिन्दुसार

d. चंद्रगुप्त

Ans. c. बिन्दुसार

5. निम्नलिखित में से किसे देवनामा पियादासी के नाम से जाना जाता था?

a. भगवान महावीर

b. मौर्य सम्राट अशोक

c. गौतम बुद्ध

d. मौर्य राजा चंद्रगुप्त मौर्य

Ans. b. मौर्य सम्राट अशोक

6. अशोक का संबंध किस राजवंश से था?

a. गुप्ता

b. वर्धन

c. मौर्य

d. कुषाण

Ans. c. मौर्य

7. अशोक की प्रशासनिक नीति में, किस परिवर्तन ने बहुत गहरा बदलाव लाया था?

a. उनका बौद्ध धर्म में अवतार लेना

b. तीसरी बौद्ध परिषद

c. अशोक की मिशनरी को ‘सीलोन’ (श्री लंका) में भेजा जाना

d. कलिंग युद्ध

Ans. d. कलिंग युद्ध         

Another Question and Answer related to this chapter

1. अशोक ने अपने साम्राज्य में न्याय करने के लिए निम्नलिखित में से किसे नियुक्त किया था?

a. राजुका

b. शर्माना

c. उपरीका

d. कुमार अमात्य

Ans. a. राजुका

2. अशोक का एडिक्ट (Edict) उत्तराखंड राज्य में कहा पर स्थित है?

a. ऋषिकेश में

b. देव प्रयाग में

c. कलसी में

d. केदारनाथ में

Ans. c. कलसी में

3. पहली बार अशोक के ब्राह्मी शिलालेख के मतलब को किसने निकाला था?

a. वी. एन. मिश्रा

b. जेम्स प्रिंसप

c. एस. आर. गोयल

d. एच. डी. सांकलिया

Ans. b. जेम्स प्रिंसप

4. पाटलिपुत्र के प्रशासन का विवरण किस पुस्तक पर उपलब्ध है?

a. इंडिका

b. अशोक के शिलालेख

c. दिव्यावदान

d. अर्थशास्त्र

Ans. a. इंडिका

5. सांची स्तूप का निर्माण किसने किया था?

a. कौटिल्य

b. गौतम बुद्ध

c. अशोक

d. चंद्रगुप्त

Ans. c. अशोक

6. अशोक के किस रॉक एडिक्ट में कलिंग युद्ध की भयावहता का वर्णन किया गया है?

a. धौली में कलिंग एडिक्ट

 b. एडिट जौगाधा (Edict at Jaugadha)

c. 10 वां रॉक एडिक्ट

d. 13 वां रॉक एडिक्ट

Ans. d. 13 वां रॉक एडिक्ट

7. मौर्य युग की अवधि के दौरान सबसे प्रसिद्ध शैक्षिक केंद्र कोनसा था?

a. उज्जैन
b. वैशाली
c. नालंदा
d. तक्षशिला
Ans. d. तक्षशिला

Conclusion

दोस्तों उम्मीद करती हु की Samrat Ashok की यह पोस्ट पड़कर आपसभी को अच्छा लगा हो। क्यों की आसान भाषा में Ashoka पोस्ट को वर्णन करने का प्रयास किया गया है।दोस्तों अगर आपसभी को यह पोस्ट पड़ने में पसंद आया हे तो, कृपया इस पोस्ट को Facebook, twitter, pinterest and Instagram जैसे Social sites पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करे। और, यह पोस्ट को पड़ने के लिए आप सभी को दिल से ‘धन्यवाद’

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